のぬふ

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2007-03-29

[]「蒼天の拳 16」 原哲夫

新刊が出るたびに内容を忘れていきます。読み終わった直後の感想としては最後の一ページがこの巻の全てなんじゃないのという感じだ。「ふ~あんた北斗に文句があんの!?」っつう拳志郎の。

本当にもう初期の面白さは失われてしまった感じである。中途半端にシリアスな分悪ふざけもそこそこになってしまったし、何よりなんか漫画としてちょっとおかしい感じがする。コマの運びだとか台詞だとか。漫画的に難しいことはよく解りませんけど、読んでいてものすごく違和感を感じさせるのですよね。まあそこら辺は原哲夫一人で描いた漫画全部に漂っているといえばそうなんだけど。

お話的にはあんまり展開もなく、西斗月拳の人が北斗の人間を倒したいのよねーつって、卑怯なことをしたりしながら、前哨戦を戦うだけの話であった。もう正直いってどこに向かっているのか全然解らないよ原先生。ヤサカのキャラもなんだかよくわかんねえ。けどまあついていきますよ新しいのが出てるのを気付いたら読む程度には。

蒼天の拳 (16)

蒼天の拳 (16)

[]思いついたときは笑ったんだけどな

「俺だけがこうしてunknownと暮らしている」

[]有頭日記

職場の弁当屋のメニューを見ていたら「有頭エビフライ」という項目があったので、別に頭ついてなくてもいいんじゃねえの…というか、いつもは頭の付いてないエビフライが出ているのでどういった心持ちで有頭なのか…というかいつものは、もちろん無頭エビフライということになるわけだけどわざわざそういう表記はしないわけであるからして有頭というのは特別な存在であるということでありますよね。あと無頭エビフライは武藤エビフライでありナチュラルボーンエビフライでありエビフライLOVEであるよねなどと思ったりもしたよって何言ってんだバカ。

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